
गौला नदी के भीतर रह गई 4500 से अधिक भरी गाड़ियां, वाहन स्वामियों ने लगाया अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
लालकुआं। गौला नदी के अधिकांश गेटों से आज वृहस्पतिवार को 4500 से अधिक गाड़ियां बाहर नहीं निकल पाई और आरबीएम लादकर नदी के अंदर ही खड़ी हुई हैं। अधिकारी जहां इसे तकनीकी खामी बता रहे हैं, वहीं खनन व्यवसायियों ने इसे अधिकारियों की बड़ी लापरवाही बताया है।
वाहन स्वामियों के मुताबिक इस खनन सत्र में जिस दिन से गौला निकासी शुरू हुई है, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से भरी हुई अनेक गाड़ियां नदी के भीतर ही खड़ी रह जा रही हैं। आज वृहस्पतिवार को भी गौला नदी के विभिन्न निकासी गेटों के अंदर आरबीएम से भरी हुई तमाम गाड़ियां खड़ी रह गयीं।
जानकारी के मुताबिक आज वृहस्पतिवार को शाम 5 बजे तक गौला नदी के शीशमहल गेट में 525 गाड़ियां, इंदिरा नगर गेट में 600 गाड़ियां, आंवला चौकी गेट में 540 गाड़ियां, गोरापड़ाव गेट में 900 गाड़ियां, लालकुआं गेट में 650 गाड़ियां, देवरामपुर गेट में 350 गाड़ियां, हल्दुचौड़ गेट में 400 गाड़ियां, बेरीपड़ाव गेट में 600 गाड़ियां एवं मोटाहल्दू गेट में 569 गाड़ियां नदी के अंदर खनन सामग्री भर कर खड़ी रह गई।
खनन समिति के अध्यक्ष रमेश जोशी का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते वाहन स्वामियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, एक-एक चक्कर आरबीएम लाने के लिए वाहन को दो दिन तक नदी के भीतर रुकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा यह सब अधिकारियों की लापरवाही की वजह से हो रहा है। वन निगम ने गाड़ी की आरसी के अनुसार वजन लाने को कहा है, जिससे तौल कांटों पर वाहनों को बार-बार खनन सामग्री उतारनी पड़ रही है। जिससे तौल कांटों पर हमेशा जाम रहता है और इससे गाड़ियां नदी के अंदर ही रह जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस नियम को मानने के लिए वाहन स्वामी भी मजबूर हैं।
वहीं अधिकारी सर्वर डाउन होने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। वन विकास निगम के डीएलएम धीरेश बिष्ट का कहना है कि खनन विभाग के ई-रवन्ना वाले सर्वर में दिक्कत चल रही है, आज उनके द्वारा जिला खान अधिकारी को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। खान अधिकारी का कहना है कि अब सर्वर की समस्या का समाधान हो चुका है, परंतु इसके बावजूद भी एक वाहन निकालने में 10 मिनट से अधिक समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि आज विभिन्न गेटों में 4500 से अधिक वाहन नदी के अंदर रह गए हैं, जो कल शुक्रवार को ही बाहर निकल सकेंगे।








