
शोषण के खिलाफ भोजन माताओं की राज्यव्यापी हड़ताल, सरकार को भेजा मांगों का ज्ञापन
हल्द्वानी। उत्तराखंड की हजारों मिड-डे मील से जुड़ी भोजन माताएं वर्षों से जारी शोषण, उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ 2 फरवरी को राज्यव्यापी आंदोलन पर उतर आईं और उन्होंने हल्द्वानी सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई।
भोजन माताओं का कहना है कि सरकार द्वारा घोषित मानदेय आज तक धरातल पर लागू नहीं हुआ है। विद्यालयों में उनसे उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर सफाई, चौकीदारी, मैदान व कमरों की साफ-सफाई, माली और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। कई स्कूलों में रसोई, गैस, पानी और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, इसके बावजूद समय पर भोजन उपलब्ध कराने का पूरा दबाव उन्हीं पर डाला जाता है और विरोध करने पर काम से हटाने, अभद्र टिप्पणियों व मानसिक दबाव जैसी धमकी दी जाती हैं। कई स्थानों पर अपमानजनक व्यवहार के मामले भी सामने आए हैं।
इस अवसर पर प्रगतिशील भोजन माता संगठन उत्तराखंड, नैनीताल की महामंत्री रजनी जोशी ने कहा कि भोजन माताएं सिर्फ रसोइया नहीं हैं, वे बच्चों के पोषण और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन उन्हें सबसे कमजोर कड़ी समझकर शोषण कर रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि समय रहते हमारी जायज़ मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
वहीं भोजन माताओं की प्रमुख मांगों में घोषित मानदेय तत्काल लागू किया जाए, भोजन माताओं से गैर-निर्धारित कार्य लेना बंद किया जाए, न्यूनतम वेतन ₹18,000 लागू किया जाए, स्कूलों में रसोई, गैस, पानी व सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए, उत्पीड़न, शोषण व अभद्र व्यवहार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो और भोजन माताओं को सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान किया जाए।
कार्यक्रम के समर्थन में पछास के महासचिव महेश, चंदन, भाकपा माले से कैलाश पांडे, कांग्रेस से हेमंत साहू, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से पुष्पा, क्रालोस से मुकेश भंडारी सहित चंपा गिनवाल, पुष्पा कुड़ाई, हेमा, उमा, दीपा विष्ट, हीरा, इंदू रैक्वाल, दीपा उप्रेती, ममता सहित बड़ी संख्या में भोजन माताएं मौजूद रहीं।








