
बाघों के बीच हुई वर्चस्व की लड़ाई में ‘भोला’ गंभीर रूप से जख्मी, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
रिपोर्ट: जिला संवाददाता नैनीताल।
नैनीताल। बाघ जैसा ताकतवर जानवर भी अगर अपने वर्चस्व की लड़ाई में लहूलुहान हो जाए, तो उसकी दहाड़, दर्द में बदल जाती है। यहां नैनीताल जनपद के रामनगर स्थित कॉर्बेट नेशनल पार्क में फाटो, झिरना और ढेला सफारी जोन में पर्यटकों को अक्सर दिखाई देने वाला बाघ ‘भोला’ क्षेत्र पर कब्जे और वर्चस्व की लड़ाई के दौरान दूसरे बाघ से हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके शरीर पर कई गहरे जख्म हो गए, जिनमें समय के साथ कीड़े पड़ गए।
इस लड़ाई के बाद उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि जंगल का यह शक्तिशाली शिकारी खुद शिकार करने में भी असमर्थ हो गया। जैसे ही घायल बाघ की सूचना कॉर्बेट प्रशासन तक पहुंची, वन्यजीव विशेषज्ञों ने उसकी स्थिति का आकलन किया। चिकित्सकों की राय थी कि घाव बेहद गंभीर हैं और तत्काल इलाज नहीं मिला तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसके बाद बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। देर रात कॉर्बेट के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और उनकी विशेषज्ञ टीम ने बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान चलाया। बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज़ कर सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया और उसे कॉर्बेट के रेस्क्यू सेंटर लाया गया, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका इलाज शुरू कर दिया गया है।
कॉर्बेट प्रशासन के मुताबिक, भोला की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। संक्रमण को नियंत्रित करने, घावों को भरने और उसे जल्द स्वस्थ कर दोबारा प्राकृतिक आवास में लौटाने के लिए हरसंभव चिकित्सकीय प्रयास किए जा रहे हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन न केवल कॉर्बेट की त्वरित वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जंगल में जीवन का संघर्ष कितना कठोर होता है और समय पर मानवीय हस्तक्षेप कई बार एक बेशकीमती वन्यजीव की जिंदगी बचा सकता है।









