
जिलाधिकारी नैनीताल की सख्त कार्रवाई, फायरिंग मामले में लाइसेंस निरस्त, कैंची धाम में पट्टा भी किया रद्द

नैनीताल। नैनीताल जिले में कानून-व्यवस्था और सरकारी जमीनों के दुरुपयोग को लेकर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में हुए एक जमीनी विवाद और फायरिंग प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने आरोपी महेंद्र तड़ागी के नाम पर जारी दो शस्त्र लाइसेंसों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से जिलेभर के दबंगों और नियमों का उल्लंघन करने वालों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों एक भूमि विवाद के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई थी। मामले की जांच रिपोर्ट और परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पाया कि हथियारों का दुरुपयोग सार्वजनिक शांति के लिए खतरा है। इसी आधार पर दोनों लाइसेंस रद्द करने के आदेश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शस्त्रों का उपयोग डराने-धमकाने या अवैध कार्यों के लिए करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
शस्त्र लाइसेंस के साथ-साथ प्रशासन ने अवैध भूमि उपयोग पर भी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के समीप स्थित एक आवासीय पट्टे की भूमि को भी निरस्त कर दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि लगभग 0.008 हेक्टेयर भूमि, जो केवल आवासीय उद्देश्य के लिए आवंटित की गई थी, वहां नियमों को ताक पर रखकर व्यावसायिक रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा था।
नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिलाधिकारी ने इस बेशकीमती भूमि को वापस राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को धार्मिक पर्यटन क्षेत्र में बढ़ते अवैध व्यवसायों पर लगाम कसने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। कैंची धाम क्षेत्र में जमीन के पट्टों की जांच अब और तेज होने की संभावना है।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी भूमि, आवंटित पट्टों और शस्त्र लाइसेंसों के नियमों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में उनके द्वारा भूमि उपयोग की निरंतर निगरानी की जाए।









