
उत्तराखंड : एमबीबीएस में फर्जी प्रमाण पत्रों से दाखिला, 19 प्रवेश किए निरस्त
एसआईटी जांच जारी, फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज
ऊधमसिंह नगर। उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी आरक्षण का लाभ लेने के लिए कथित फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला अब एमबीबीएस दाखिलों तक पहुंच गया है। एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर हुए कुल 19 एमबीबीएस दाखिलों को निरस्त कर दिया है। इनमें अकेले उधमसिंह नगर जिले के 12 मामले सामने आए हैं। इस तरह अब तक सामने आए कुल मामलों में करीब दो तिहाई मामले उधमसिंह नगर से जुड़े हैं।
उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े आरक्षण का लाभ लेने के लिए जारी किए गए फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मामला अब सिर्फ सरकारी दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इन प्रमाण पत्रों के आधार पर एमबीबीएस की सीटों पर दाखिले तक होने का खुलासा हुआ है। पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं। एसआईटी ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के सामने अब तक 19 ऐसे प्रकरण स्पष्ट हुए हैं, जिनमें कार्रवाई की गई है। इनमें अकेले उधमसिंह नगर जिले के 12 मामले हैं। यानी अब तक सामने आए कुल मामलों में करीब दो तिहाई मामले इसी जिले से जुड़े हैं। इसके अलावा देहरादून के चार मामले सामने आए हैं, जबकि तीन अन्य मामलों में अभी जांच जारी है।
इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर MBBS की सीटों पर दाखिला हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के मामले सामने आने के बाद एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने कुल 19 दाखिले निरस्त कर दिए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के मुताबिक, जिन दाखिलों को निरस्त किया गया है, उनकी जगह मेरिट के आधार पर दूसरे पात्र अभ्यर्थियों को प्रवेश का मौका दिया जा रहा है।
उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। तीसरे दौर की काउंसलिंग चल रही है, जो 8 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद एक और काउंसलिंग प्रस्तावित है। ऐसे में फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच का असर आगे होने वाली सीटों के आवंटन पर भी पड़ सकता है। विभाग अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि विवादित प्रमाण पत्रों के आधार पर किसी अपात्र अभ्यर्थी को एमबीबीएस की सीट न मिल सके।
फर्जी प्रमाण पत्रों के मामले में एसआईटी ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर फर्जी प्रमाण पत्र किस स्तर पर तैयार हुए, इन्हें जारी कराने में किन लोगों की भूमिका रही और इनके आधार पर एमबीबीएस समेत दूसरे आरक्षण लाभ किस तरह हासिल किए गए। मामले में पहले भी कुछ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और लोगों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे मामले में पटवारी संघ की ओर से भी अपना पक्ष सामने रखा गया है। संघ की ओर से काम के अत्यधिक दबाव और काम की अधिकता के कारण सत्यापन प्रक्रिया में गलतियां होने की बात कही जा रही है। स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े प्रमाण पत्रों के लिए जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन में पटवारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे के स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने की संस्तुति की जाती है।
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी हुए हैं तो यह जांच का विषय है कि सत्यापन के दौरान इन्हें पकड़ा क्यों नहीं गया और प्रक्रिया के किस स्तर पर चूक हुई। यही सवाल अब एसआईटी की जांच के केंद्र में भी है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि जिन मामलों में प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं, उन प्रमाण पत्रों के आधार पर हुए दाखिले निरस्त कर दिए गए हैं। इन सीटों पर मेरिट के आधार पर दूसरे अभ्यर्थियों को प्रवेश का अवसर दिया जा रहा है। साथ ही पूरे मामले की जांच जारी है।









