
लालकुआं में बढ़ते प्रदूषण को लेकर जनाक्रोश, समाजसेवियों ने केंद्र सरकार व एनजीटी से लगाई गुहार
लालकुआं। लालकुआं क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्थानीय नागरिकों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। लालकुआं स्थित सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल से फैल रही तेज ध्वनि, दुर्गंध, धुएं और प्रदुषित जल से जनजीवन प्रभावित होने की शिकायत करते हुए क्षेत्र के समाजसेवियों ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
लालकुआं तहसीलदार के माध्यम से समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ भट्ट और हर्ष सिंह बिष्ट द्वारा विस्तृत शिकायत पत्र प्रेषित किया गया है। साथ ही इस शिकायती पत्र की प्रति रजिस्ट्री एवं स्पीड पोस्ट के माध्यम से भी संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।
शिकायती पत्र में कहा गया है कि लालकुआं स्थित सेंचुरी पेपर मिल से निकलने वाली दुर्गंध का प्रभाव 10 से 15 किलोमीटर क्षेत्र तक महसूस किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को सांस संबंधी रोग, एलर्जी, आंखों व त्वचा में जलन के साथ ही अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
समाजसेवियों के मुताबिक मिल से निकलने वाला अपशिष्ट जल नालों के माध्यम से कृषि भूमि तक पहुंच रहा है, जिससे खेतों की उर्वरता प्रभावित हो रही है और फसलों को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही पशुओं के बीमार होने तथा खाद्य सामग्री तक दुर्गंध से प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
समाजसेवियों ने बताया कि 18 फरवरी को आयोजित जिलाधिकारी जनता दरबार में भी इस संबंध में शिकायत दी गई थी, जिस पर संबंधित विभागों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
शिकायत पत्र में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम-1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम-1981 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच कराने, पूर्व में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं की जांच तथा दोषी पाए जाने पर मिल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
समाजसेवियों ने प्रभावित नागरिकों एवं किसानों को मुआवजा और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर मामला राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एवं उच्च न्यायालय में उठाया जाएगा। फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र के समाजसेवियों और जनता में आक्रोश व्याप्त है। उनका स्पष्ट कहना है कि वे सेंचुरी मिल के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी लड़ाई प्रदुषण के खिलाफ है। जिसको जनहित में नियन्त्रित किया जाना आवश्यक है।









