
हल्द्वानी: आंख के इलाज के दौरान मरीज की मौत, नामी निजी नेत्र अस्पताल पर परिजनों का हंगामा

हल्द्वानी। नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। यहां सोमवार को एक 38 वर्षीय व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
जानकारी के मुताबिक, मृतक राजपाल आंख का इलाज कराने शहर के एक नामी निजी अस्पताल पहुंचा था, लेकिन उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे आठ बच्चों को छोड़ गया है, जिनमें पांच बेटियां शामिल हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
वहीं मौत की खबर सुनकर परिजन रामनगर से सीधे हल्द्वानी में ठंडी सड़क स्थित निजी नेत्र अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने चिकित्सकों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। बताया जा रहा है कि घटना के समय संबंधित चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं मिले, जिससे परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया और अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। लेकिन पुलिस ने सूझबूझ से काम लेते हुए उन्हें किसी तरह शांत कराया।
मृतक के परिजनों के मुताबिक, रामनगर जनपद नैनीताल निवासी राजपाल के साथ यह दुर्घटना 28 मार्च को उस समय हुई थी, जब पत्थर तोड़ते समय एक कंकरी उनकी आंख में लग गई। दृष्टि को बचाने हेतु परिजन उन्हें हल्द्वानी स्थित एक प्रसिद्ध निजी नेत्र अस्पताल लेकर आए। चिकित्सक की परामर्श पर पूर्व में एक शल्य क्रिया की गई थी, जिसके उपरांत निरंतर जांच और दवाएं चलती रहीं। 15 अप्रैल की शाम को दोबारा ऑपरेशन की आवश्यकता बताते हुए मरीज को भर्ती किया गया, किंतु यही प्रक्रिया उनकी मौत का कारण बनीं।
परिजनों द्वारा कोतवाली हल्द्वानी में दी गई शिकायत के मुताबिक, 15 अप्रैल की शाम करीब साढ़े सात बजे से रात पौने दस बजे तक ऑपरेशन चला। इसके पश्चात चिकित्सक ने मरीज का रक्तचाप अत्यधिक बढ़ने की सूचना दी। स्थिति अत्यंत गंभीर होने पर परिजन उन्हें आनन-फानन में हल्द्वानी के ठंडी सड़क स्थित एक अन्य जाने-माने निजी चिकित्सालय (Multi-specialty Hospital) लेकर पहुंचे, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस सूचना से परिजनों में कोहराम मच गया और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
परिजनों ने बताया मृतक राजपाल अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे और उनके आठ छोटे बच्चे हैं। पिता की मृत्यु के पश्चात अब इन मासूमों के भरण-पोषण और भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। परिजनों ने प्रशासन से संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने और अनाथ हुए आठ बच्चों हेतु उचित आर्थिक सहायता एवं मुआवजे की पुरजोर मांग की है।
वहीं घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर अमित कुमार ने बताया कि परिजनों से प्राप्त तहरीर के आधार पर गहनता से जांच की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराने और चिकित्सा रिपोर्ट के विश्लेषण के पश्चात ही मृत्यु के वास्तविक कारणों का स्पष्टीकरण हो सकेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध विधि सम्मत कठोर कार्यवाही की जाएगी।







